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हाथों की रेखाओं से जानें अपना भविष्य

Posted On 19 May, 2013 में

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handआपका भविष्य आपके हाथों में छुपा होता है. जन्म से ही हर किसी की हाथ में कुछ निर्धारित रेखाएं जैसे मस्तिष्क रेखा, हृदय रेखा और जीवन रेखा होती ही है. पर जन्म के समय ये रेखाएं पूर्ण विकसित नहीं होतीं अत: एक शिशु का हाथ देखकर ठीक-ठीक उसके जावन का अनुमान नहीं लगाया जा सकता पर किशोरावस्था तक ये रेखाएं पूर्ण विकसित हो जाती हैं और इनसे उनके जीवन के घटनाक्रमों का बहुत हद तक विवरण पता किया जा सकता है. एक बात यहां अति आवश्यक है कि कर्म को ज्योतिष की हर विधा में सर्वोपरि माना गया है. मतलब भाग्य की बातें तो आप हाथ की रेखाओं या अन्य ज्योतिषीय विधा से जान सकते हैं पर अंतत: आपका कर्म ही आपको फल देता है. अत: ये आपके कर्मानुसार कई बार भविष्यवाणियां गलत भी हो जाती हैं. हस्त रेखा शास्त्र (Samudrik Shastra) में भी यह नियम लागू होता है. ऐसा माना जाता है कि स्त्रियों का बायां हाथ और पुरुषों का दायां हाथ देखा जाना चाहिए. वस्तुत: यह एक भ्रम है. आपके बाएं हाथ की हथेली आपके भाग्य की हथेली है जिसकी रेखाएं उम्र भर समान होती हैं और दाएं हाथ की हथेली कर्म प्रधान हथेली है जिसकी रेखाएं आपके अच्छे-बुरे कर्मों के अनुसार बनते और बिगड़ते हैं. इसलिए हाथ देखते वक्त दोनों हाथों की हथेलियों को समान रूप से गओर करना चाहिए. पर आपके जीवन का घटनाक्रम आपके दाएं हाथ की हथेली अनुसार ही होंगे. इसलिए अगर बायां हाथ अच्छा है और अगर दायां हाथ बुरा तो दाएं हाथ अनुसार ही घटनाक्रम माने जाएंगे, ऐसे ही अगर बायां हाथ बुरा और दायां हाथ अच्छा है तो भी दाएं हाथ अनुसार ही घटनाक्रम माने जाएंगे. अपने दाएं हाथ की लकीरों को आप बनते-बिगड़ते, अच्छा से बुरा और बुरा से अच्छा में बदलते देख सकते हैं. एक प्रकार से हमारी हाथों की रेखाएं प्रतीक हैं इस बात का कि कर्म से भाग्य बदला जा सकता है. हालांकि ज्योतिष की हर विधा यही कहती है पर क्योंकि उन्हें पढ़ना सभी नहीं जानते. पर हाथ की लकीरों को आप भी समझ सकते हैं. यहां आपकी मदद के लिए कुछ महत्वपूर्ण रेखाओं का विवरण दिया गया है.


हथेली की मुख्य रेखाएं:

-जीवन रेखा (Life Line)

-हृदय रेखा (Heart Line)
-मस्तिष्क रेखा
(Brain Line)

-भाग्य रेखा (Fortune Line)

जीवन रेखा (Life Line)

जीवन रेखा हृदय रेखा के ऊपरी भाग से शुरु होकर आमतौर पर मणिबन्ध पर जाकर समाप्त हो जाती है.यह रेखा भाग्य रेखा के समानान्तर चलती है, परन्तु कुछ व्यक्तियो की हथेली में जीवन रेखा हृदय रेखा में से निकलकर भाग्य रेखा में किसी भी बिन्दु पर मिल जाती है. जीवन रेखा तभी उत्तम मानी जाती है यदि उसे कोइ अन्य रेखा न काट रही हो तथा वह लम्बी हो इसका अर्थ है कि व्यक्ति की आयु लम्बी होगी तथा अधिकतर जीवन सुखमय बीतेगा. रेखा छोटी तथा कटी होने पर आयु कम एंव जीवन संघर्षमय होगा.


भाग्य रेखा:(Fate Line)

हृदय रेखा के मध्य से शुरु होकर मणिबन्ध तक जाने वाली सीधी रेखा को भाग्य रेखा कहते. स्पष्ट रुप से दिखाई देने वाली रेखा उत्तम भाग्य का घौतक है. यदि भाग्य रेखा को कोइ अन्य रेखा न काटती हो तो भाग्य में किसी प्रकार की रुकावट नही आती. परन्तु यदि जिस बिन्दु पर रेखा भाग्य को काटती है तो उसी वर्ष व्यक्ति को भाग्य की हानि होती है. कुछ लोगो के हाथ में जीवन रेखा एंव भाग्य रेखा में से एक ही रेखा होती है. इस स्थिति में वह व्यक्ति आसाधारण होता है, या तो एकदम भाग्यहीन या फिर उच्चस्तर का भाग्यशाली होता है. ऎसा व्यक्ति मध्यम स्तर का जीवन कभी नहीं जीता है.


हृदय रेखा: (Heart Line)

हथेली के मध्य में एक भाग से लेकर दूसरे भाग तक लेटी हुई रेखा को हृदय रेखा कहते हैं. यदि हृदय रेखा एकदम सीधी या थोडा सा घुमाव लेकर जाती है तो वह व्यक्ति को निष्कपट बनाती है. यदि हृदय रेखा लहराती हुई चलती है तो वह व्यक्ति हृदय से पीडित रहता है. यदि रेखा टूटी हुई हो या उस पर कोइ निशान हो तो व्यक्ति को हृदयाघात हो सकता है.


मस्तिष्क रेखा:(Brain Line)

हथेली के एक छोर से दूसरे छोर तक उंगलियो के पर्वतो तथा हृदय रेखा के समानान्तर जाने वाली रेखा को मस्तिष्क रेखा  कहते हैं. यह आवश्यक नहीं कि मस्तिष्क रेखा एक छोर से दूसरे छोर तक जायें, यह बीच में ही किसी भी पर्वत (Planetary Mounts) की ओर मुड सकती है. यदि हृदय रेखा और मस्तिष्क रेखा आपस में न मिलें तो उत्तम रहता है. स्पष्ट एंव बाधा रहित रेखा उत्तम मानी जाती है. कई बार मस्तिष्क रेखा एक छोर पर दो भागों में विभाजित हो जाती है. ऎसी रेखा वाला व्यक्ति स्थिर स्वभाव का नहीं होता है, सदा भ्रमित रहता है।


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